ऋतुराज वसंत के मधुमय शुभागमण की बेला मे दिनांक 05-02-2022 (शनिवार) को वसुधा कल्याण आश्रम परिवार के शैक्षणिक प्रकोष्ठ “श्री कल्याण भारती” द्वारा आयोजित “माँ सरस्वती पूजनोत्सव” के शुभ अवसर पर वीणा पुस्तक धारिणी वरदायिनी एवं पद्मासन पर विराजमान अधिष्ठात्रि देवी माँ के श्री चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करने आश्रम परिवार के सदस्य एकत्रित हुए!

संस्था के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु परमपूज्य आचार्य श्री पावन महाराज जी ने कहा कि ‘वसुधा कल्याण आश्रम परिवार’ इस वर्ष से संगीत, कला, वाणी, मातृत्व, आध्यात्मिकता, विद्या, ज्ञान, प्रज्ञा, ग्रंथ, मन्त्र, वेदांत और नदियों की अधिष्ठात्री देवी माँ शारदा की आराधना प्रारम्भ कर रहा है। कल्याण परिवार इस अनुबोध से पूर्ण है कि नवआशा एवं नवसंकल्प के पर्व बसंत पंचमी की सार्थकता ‘प्रकृति’ स्वरुप माँ सरस्वती की आराधना में है। वास्तव में यह त्योहार, प्रकृति में जीवन, रस और ज्ञान के प्रसार का उत्सवकाल है।
समस्त ज्ञान-विज्ञान, शिल्प एवं समस्त कलायें, त्रिगुणात्मक शक्ति संम्पन्न ‘प्रकृति’ में समाहित हैं। इनकी देवी सरस्वती हैं जिनकी वीणानाद से समस्त प्रकृति में चेतनता आती है। माँ सरस्वती की आराधना मानव जीवन में ज्ञान के प्रकाश द्वारा रचनात्मक वृतियों का सृजन करते हुए सत्य, अहिंसा, क्षमा, सहनशीलता, करुणा, मैत्री, प्रेम, परोपकार व प्रज्ञा जैसे सद्गुणों को बढाने की प्रेरणा देती है, जिससे मनुष्य ज्ञान तत्व के अवलंबन से अष्टपाशों से मुक्त हो सके।
मैं अपने एवं समस्त वसुधा कल्याण आश्रम परिवार की ओर से आप सभी को बसंत पंचमी के इस पावन पर्व पर हार्दिक बधाई, शुभकामनाएँ एवं अशीष प्रेषित करता हूँ। माँ शारदा सभी का कल्याण करें।
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